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करवाचौथ आज : सुहागन महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत, बेसब्री से रहेगा चांद निकलने का इंतजार

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करवाचौथ को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाओं के लिए इससे बड़ा कोई और पर्व है ही नहीं। बुधवार को करवाचौथ का पर्व सुहागिन महिलाएं बड़ी श्रद्धा से मनाएंगी। दिनभर निर्जला व्रत रखकर वे शाम को चांद के दर्शन कर व्रत पूरा करेंगी। शहर में कई जगह सजे हुए खूबसूरत करवे बक्री के लिए सजे हैं। इतना ही नहीं। कई जगह बताशे वालों ने शक्कर से बने करवे भी बिक्री के लिए रखे हैं। मंगलवार को दिनभर बाजार में महिलाएं त्योहार से संबंधित खरीदारी व तैयारियों को अंतिम रूप देती नजर आई। पूजा का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य सुगन नागर ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर रात 9.30 बजे से से एक नवंबर रात 9.19 बजे तक है। उदया तिथि के अनुसार करवाचौथ बुधवार को है। व्रत का समय सुबह 06:38 से रात 08:28 बजे तक रहेगा। करवा पूजा का मुहूर्त शाम 05.42 से रात्रि 07.02 बजे तक है। चांद कब निकलेगा? करवाचौथ की शाम बारां में चांद 8.28 बजे दिखाई देगा। इस दिन चांद निकलने का व्रत कर रही महिलाओं को खासा इंतजार रहता है। खूब बिके चूड़ी, कंगन और करवे इधर जिले के छबड़ा में भी करवा चौथ पर बाजारों में खासी गहमा...

Rajasthan Election Story : हरी झंडी मिली, बांछे खिलीं, लेकिन वापस लेना पड़ा नामांकन पत्र

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Rajasthan Election Story : यह बात 1998 में हुए विधानसभा चुनाव की है। तब भारतीय जनता पार्टी ने बारां विधानसभा क्षेत्र से वरिष्ठ नेता प्रेमनारायण गालव को चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी थी। गालव ने भाजपा नेताओं के साथ जुलूस निकाल नामांकन पत्र भी दाखिल कर प्रचार शुरू कर दिया था, लेकिन बाद में पार्टी ने यहां से सोहनलाल गुप्ता को उम्मीदवार घोषित कर सिम्बल सौंप दिया था। इसका काफी विरोध हुआ। इसके बाद नाम वापस लेने की अन्तिम तारीख के पहले की रात वरिष्ठ नेता भैरोंसिंह शेखावत ने ललित किशोर चतुर्वेदी को बारां भेजा था। यह भी पढ़ें : राजस्थान विधानसभा चुनाव: 'अलोकप्रिय' विधायकों के टिकट पर राहुल गांधी की आपत्ति, इन नामों पर अभी भी संशय बरकरार चतुर्वेदी ने पूरी रात पार्टी नेताओं से मंत्रणा कर गालव को मनाने के जतन किए थे। गालव के समर्थकों के अड़ने से पहले तो विवाद गहरा गया, लेकिन इसके बाद निर्धारित समय से कुछ मिनट पूर्व खुद गालव ने चुनिंदा साथियों के साथ निर्वाचन कार्यालय पहुंच नामजदगी का पर्चा वापस ले लिया। उनकी इस निष्ठा से पार्टी कार्यकर्ताओं में उनका कद और भी बढ़ा हो गया, लेकिन चुनाव पर...

देह, अंगदान और रक्तदान कर जिले में प्रेरणा बन गए पिता-पुत्र

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कहते हैं जब किसी भी कार्य को करने का जुनून सवार हो तो कोई काम बड़ा नहीं। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है क्षेत्र के युवा ने जो राजकीय सेवा में कार्यरत होते हुए नर सेवा के कार्य करने में कहीं कमी नहीं छोड़ता। यहां तक की परिवार के सभी सदस्य उसे कार्य को नारायण सेवा समझकर 24 घंटे करने में जुटे हुए हैं। कवाई कस्बे के समीप स्थित पारलिया गांव निवासी मर्मिट परिवार के सदस्य मानव कल्याण कार्य के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। वहीं ओरों को भी इसके लिए प्रेरित करने में जुटे हैं। लोगों के लिए बने प्रेरणा पिता व पुत्र ने देहदान की घोषणा कर अब तक कई बार रक्तदान किया है। पिता पेंशनर अध्यापक हैं तो पुत्र वर्तमान में शिक्षक के पद पर कार्यरत है। छीतर लाल मर्मिट जो राजकीय सेवाओं में शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थे। जिनकी राउमावि खोपर से 2013 मे सेवानिवृत्ति हो चुकी है। पुत्र डॉ. अनिल मर्मिट वर्तमान में झालावाड़ जिले के खानपुर में अध्यापक हैं। कई जगह हुआ सम्मान सामाजिक कार्यों को लेकर उन्हें बारां, कोटा, झालावाड़, बूंदी, जयपुर, झुंझुनूं, चुरू, माउन्ट आबू (सिरोही), बीकानेर, राजगढ़, इन्दौर, भ...

देह, अंगदान और रक्तदान कर जिले में प्रेरणा बन गए पिता-पुत्र

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कहते हैं जब किसी भी कार्य को करने का जुनून सवार हो तो कोई काम बड़ा नहीं। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है क्षेत्र के युवा ने जो राजकीय सेवा में कार्यरत होते हुए नर सेवा के कार्य करने में कहीं कमी नहीं छोड़ता। यहां तक की परिवार के सभी सदस्य उसे कार्य को नारायण सेवा समझकर 24 घंटे करने में जुटे हुए हैं। कवाई कस्बे के समीप स्थित पारलिया गांव निवासी मर्मिट परिवार के सदस्य मानव कल्याण कार्य के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। वहीं ओरों को भी इसके लिए प्रेरित करने में जुटे हैं। लोगों के लिए बने प्रेरणा पिता व पुत्र ने देहदान की घोषणा कर अब तक कई बार रक्तदान किया है। पिता पेंशनर अध्यापक हैं तो पुत्र वर्तमान में शिक्षक के पद पर कार्यरत है। छीतर लाल मर्मिट जो राजकीय सेवाओं में शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थे। जिनकी राउमावि खोपर से 2013 मे सेवानिवृत्ति हो चुकी है। पुत्र डॉ. अनिल मर्मिट वर्तमान में झालावाड़ जिले के खानपुर में अध्यापक हैं। कई जगह हुआ सम्मान सामाजिक कार्यों को लेकर उन्हें बारां, कोटा, झालावाड़, बूंदी, जयपुर, झुंझुनूं, चुरू, माउन्ट आबू (सिरोही), बीकानेर, राजगढ़, इन्दौर, भ...

rajasthan election : लोकतंत्र के यज्ञ में देंगे मतदान की आहुति, निभाएंगे अपना फर्ज

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कोटा रोड स्थित निजी रिसोर्ट में राजस्थान पत्रिका के जागो जनमत अभियान के तहत मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रगति संस्थान की महिला कार्यकर्ता व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए पत्रिका की पहल की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। लोगों को मतदान कर अपना फर्ज निभाना चाहिए। संस्थान के सचिव बृजराज गौतम ने लोकतंत्र में मतदान के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह मतदान का प्रयोग कर एक अच्छी सरकार बनाएं। लोकतंत्र में एक वोट की भी बहुत ताकत होती है। मतदाताओं को वोट की ताकत पहचाननी होगी। कार्यक्रम मेंं महिलाओं ने शहर के मतदाताओं से शत-प्रतिशत मतदान कराने और खुद भी मतदान करने की शपथ ली। महिलाओं का मान सम्मान और उनके प्रति सुरक्षा का माहौल विकसित किए जाने की आवश्यकता है। ऐसी सरकार चुननी चाहिए जो महिलाओं के हितों पर खास ध्यान दे। अमृता खंडेलवाल युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे मतदान प्रतिशत निश्चित रूप से बढऩे की उम्मीद है। पहली बार मतदान करने वालों में उत्साह ...

चुनावी गलियारा : यहां की राजनीति में हमेशा रहा है परिवारों का दबदबा

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नामांकन की तारीख नजदीक आने के साथ ही जिले में चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी है। बारां जिले की दो विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में तीन परिवारों का दबदबा रहा है। बरसों से एक ही परिवार का दबदबा रहा है। छबड़ा में 1967 से अब तक तक दो.तीन चुनाव को छोडकऱ सिंघवी परिवार का वर्चस्व रहा है। पिछले दो दशक का रिकार्ड देखा जाए तो इन परिवारों के लोग की चुनाव लड़ते आ रहे है। छबड़ा में सिंघवी परिवार को टिकट छबड़ा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा में सिंघवी परिवार का दबदबा रहा है। सबसे पहले 1967 में भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में प्रेम सिंह सिंघवी ने चुनाव लड़ा था और विजयी रहे थे।1972 में उन्हें हार का सामना पड़ा था। वापस उन्होंने 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में वे विजयी हुए, हालांकि बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के लिए अपने पद इस्तीफा दे दिया था। पुत्र को लगातार मिल रहा मौका इस विधानसभा से 1985 में भाजपा ने प्रेम सिंह सिंघवी के बड़े पुत्र प्रताप सिंह सिंघवी को चुनाव मैदान में उतारा था। इस चुनाव में वे विजयी रहे थे। 1990 में बाली के साथ छबड़ा से भी पूर्व मुख्यमंत्री भै...

इस साल ये फसल किसानों को करेगी मालामाल, तोड़ेगी सारे रेकॉर्ड, किसान दे रहे प्रमुखता

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बारां जिले में खरीफ की फसल चने की बुवाई का दौर भी शुरू हो गया। जबकि सरसों की बुवाई अन्तिम दौर में पहुंच गई। किसान इस साल भाव तेज रहने से लहसुन की बुवाई को भी प्रमुखता दे रहे है। आगामी 15 नवम्बर से गेहूं की बुवाई शुरू हो जाएगी। इस वर्ष खरीफ में करीब 3.50 लाख हैक्टेयर में खरीफ की फसलों की बुवाई होने का अनुमान कृषि अधिकारियों ने लगाया है। हालांकि गत मानसून सत्र में कम बारिश होने से गेहूं की घटने व सरसों का क्षेत्रफल बढ़ने का अनुमान लगाया जाने लगा है। कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार जिले में शुक्रवार शाम तक लगभग 1.25 लाख हैक्टेयर में सरसों की बुवाई हो चुकी है। अधिकांश क्षेत्रों में अब पौध पर पत्ते बनने का दौर शुरू हो गया है। वहीं, अब चने की बुवाई भी शुरू हो गई है। करीब 3 हजार हैक्टेयर में चने की बुवाई हो चुकी है। यह भी पढ़ें : Chandra Grahan 2023: शरद पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का साया, इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव, भूलकर भी न करें ये काम फिर भी लहसुन को दे रहे तव्वजो भले ही गत मानसून सत्र में राजस्थान का चेरापूंजी कहे जाने वाले जिले में बारिश कम हुई हो, लेकिन किसान लहसुन की बुवाई को लेकर ...