दुख में भी शांति का अहसास कराती है यहां की हरियाली
प्रमोद जैन. हरनावदाशाहजी. मन में कुछ करने की दृढ इच्छा शक्ति हो और फिर कार्य मानव सेवा से जुडा हो तो सफलता के कोई मायने नही रह जाते। ऐसेे ही नित्य श्रमदान का बीडा उठाकर कर शुरु की गई पहल के बाद आपसी जनसहयोग जुटाकर कस्बे के युवाओं की एक टीम ने मोक्षधाम की कायापलट करके अनूठी मिसाल कायम कर डाली है। कभी उपेक्षा का शिकार होकर गंदगी से अटे पडे कांच पत्थर व कांटेदार झाडों से सरोबार रहने वाले मोक्षधाम परिसर की सूरत ही बदल गई है। ऐसे में अब यहां छाई हरियाली गम में यहां पंहुचने वाले शोक संतप्त परिवारों को सुखद शांति का अहसास कराती नजर आने लगी है। कस्बे से फूलबडौद को जोडने वाले रास्ते के समीप स्थित प्रमुख मुक्तिधाम लम्बे अरसे से उपेक्षा का शिकार हो रहा था। खाळ के किनारे होने के कारण यहां पर ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए चारदीवारी समेत अन्य निर्माण पानी के तेज बहाव के कारण जमींदोज हो गए थे। नतीजतन बजट के अभाव में ग्राम पंचायत द्वारा भी मुक्तिधाम परिसर उपेक्षित रहने लगा। सार संभाल व देखरेख के अभाव में गंदगी व कचरे का अम्बार लगने लगा। धीरे धीरे आवारा मवेशियों का शरण स्थली बन गया। कंटीली झाडियां परिस...