ये कैसा समाज...'मर गई संवेदनाएं, खो गई मानवता'

अन्ता. समाज में मानवीय मूल्य कितने गिर चुके। इसकी मिसाल है निकटवर्ती ग्राम बरखेड़ा निवासी 40 वर्षीय धर्मेन्द्र मालव। जो गंभीर बीमारी के कारण लहुलूहान हालत में एक सप्ताह से अन्ता में शरण लिए है। किन्तु इसका उचित इलाज कराने के लिए परिजनों सहित कोई भी स्वयं सेवी संस्था आगे नहीं आ रही। सूचना मिलने पर रविवार सांय 'पत्रिका संवाददाताÓ धर्मेन्द्र तक पहुंचा तो वह अस्पताल के आगे तारां की बाबा वाली बावड़ी वाले स्थान पर गंभीर अवस्था में था। उसने बताया कि एक सप्ताह पहले हालत बिगडऩे पर नागदा शिव मंदिर से उसे कोई अन्ता अस्पताल छोड़ गया। यहां इलाज की बारी आई तो चिकित्सकों ने कोटा में ऑपरेशन होने की बात कहते हुए एक परिजन साथ होने की बात कही। धर्मेन्द्र के अनुसार उसकी खैर खबर लेने कोई नहीं आ रहा। उसके पास ओढऩे बिछाने को भी कुछ नहीं है। ऐसे में कंपकंपाती सर्दी में उसके यह हालात हमारे सभ्य समाज सहित प्रशासन के मुंह पर गहरा तमाचा हैं।

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धर्मेन्द्र का गांव यहां से मात्र तीन किलोमीटर दूर है। परिवार के पास 15-20 बीघा जमीन है। ग्रामवासियों के अनुसार धर्मेन्द्र की प्रवृत्ति शुरू से ही घर ना टिककर इधर उधर घूमने की रही। इन हरकतों के कारण पत्नी छोड़ गई। वहीं पिता, भाई एवं अन्य परिजनों ने भी दूरी बना ली। किन्तु सवाल यह है कि अब ऐसे हालात में उसे अकेला छोड़ देना कहां तक उचित है। इस सम्बन्ध में 'पत्रिका' की सूचना पर उपखण्ड अधिकारी रजत विजयवर्गीय ने मामला दिखवाने की बात कही है। वहीं अन्ता अस्पताल के सर्जन डॉ. वीएन तिवारी के अनुसार यह केस उनकी जानकारी में नहीं है। किन्तु धर्मेन्द्र का ऑपरेशन कोटा अस्पताल में ही किया जा सकता है। इसके लिए साथ में किसी का जाना जरूरी है।



source https://www.patrika.com/baran-news/what-kind-of-society-dead-sensations-lost-humanity-6623473/

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