कमाल की जेल, बच्चों के साथ रहते हंै बंदी, सुबह-शाम हाजरी, दिन में दुकानदारी, बंदियों को मिली परिवार संग रहने की आजादी

बारां. सरकार की ओर से जिले में शुरू की गई खुली जेल (खुला बंदी शिविर) अच्छा आचरण करने वाले अपराधियों के लिए वरदान साबित हो रही है। बंदी सुबह शाम हाजरी देकर दिनभर शहर में दुकानदारी करते हंै, शाम को टीवी देखते है, बच्चों के साथ खेलते है। उन्हें घुमाने भी ले जाते हैं। इस व्यवस्था से बंदियों को रिश्तेदारों से मिलने और परिवार के साथ रहने की भी आजादी मिली हुई है। यहां जिला कारगार परिसर में ही जेल विभाग की ओर से खुली जेल शुरू की हुई है। कोरोना काल में गत अगस्त 2020 से खुली जेल शुरू की गई थी। वर्तमान में इस जेल में पांच आवासीय भवन बनाए हुए है। इनमें हत्या के आरोप में आजीवन सजायाफ्ता पांच बंदी परिवार के साथ जीवन बसर कर रहे है। खुली जेल की आजादी ऐसी है कि हत्या के बंदी भी कचौरी समोसा बेचने के अलावा कोई हाईवे पर हेलमेट बेचकर दुर्घटना से जिंदगी बचाने का काम कर रहा है तो कोई कार बाजार का काम कर रहा है।
अब जल्द शादी भी रचाएंगे
केलवाड़ा क्षेत्र निवासी हत्या का आरोपी लाखन प्रजापति का कहना है कि जेल की चारदीवारी में रहते है तो बंदिश महसुस होती है। खुली जेल में फैमली के साथ रहने का सुख मिल रहा है। पहले जयपुर जेल में था तो परिवार के लोग कम मिलते थे, अब मां उसके साथ रहने आ जाती है। कचौरी समोसा बेचकर अच्छी कमाई हो रही है। लाखन गिरफ्तारी से पहले सीताबाड़ी में परिवार की मिठाई व कचौरी समोसा की दुकान पर हाथ बंटाता था। इससे जेल में रहकर व्यवसाय करने का मौका मिला तो उसने झालावाड़ रोड पर पुलिया के समीप बाइक पर जुगाड़ की कचौरी समोसा की दुकान लगा ली। अब जल्द ही उसकी शादी होने वाली है।
सुकून से गुजर रही जिंदगी
कोटा जिले के इस्लामनगर निवासी बंदी अजीमुद्दीन का कहना है कि यहां खुली जेल में रहते हुए कार बाजार में वाहन लेकर बेचने का काम कर रहा हूं। रोजाना औसतन हजार पांच सौ रुपए का कमीशन मिल जाता है। इससे परिवार का पेट पाल रहा हूं। करीब पांच माह से यहां खुली जेल में इससे पहले करीब चार वर्षो से जयपुर सांगेनेर की खुली जेल में था। करीब ढ़ाई वर्षीय बच्ची है। बच्चों के साथ रहते है तो सुकून के साथ जिंदगी गुजर रही है।
सुधरने का मिलता है मौका
यहां जिला पुलिस लाइन में हैड कांस्टेबल की हत्या के आरोप में सजा काट रहे कांस्टेबल रामचरण सहरिया का कहना है कि करीब साढ़े आठ वर्ष जेल में रहने के बाद उसका करौली जिले में खुली जेल में दाखिला हुआ। यहां खुली जेल शुरू होने से परिवार के नजदीक आ गया। जेल में सुधरने का मौका मिलता है। बंदियों को आचरण में सुधार लाना चाहिए। सरकार की यह अच्छी सुविधा है। हेलमेट व चश्मा बेचकर रोजाना तीन, साढ़े तीन सौ रुपए की कमाई हो जाती है। बेटा एमए कर रहा है, बेटी बीएसटीसी कर रही है। छोटी बेटी फिलहाल आठवीं में है, वह हॉस्टल में रह रही है।
-यहां खुली जेल में फिलहाल पांच आवासों में पांच बंदी परिवार के साथ रह रहे हंै। यह हेलमेट, कचौरी, समोसा की बिक्री व अन्य मजदूरी के लिए बाहर जाते है। सुबह-शाम हाजरी होती है। रिश्तेदारों से मिलने में दिक्कत नहीं है, लेकिन रिश्तेदार को रात रूकना होता है तो पहले सूचना देनी होती है।
-अर्जुन सिंह, उपकारापाल, जिला कारागृह, बारां



source https://www.patrika.com/baran-news/baran-patrika-6678707/

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