संक्रमण के बीच घंटों रहते हैं ताकि आप और हम सुरक्षित रह सकें

बारां. काविड-19 के संक्रमण से हर तरफ भय का माहौल बना हुआ है। लोग संक्रमण से बचाव को लेकर खास एहतियात बरत रहे हैं। संक्रमित की मौत के बाद परिवार के उसके अपने भी दूरी बना रहे हंै, वहीं फ्रंटलाइन पर काम करने वाले कई लोग इस देश सेवा के जज्बे के साथ जानलेवा वायरस के बीच ही दिन-रात बिता रहे हंै। सबसे अधिक जोखिम कोविड-19 वायरस की जांच के लिए बनी आरटी-पीसीआर लैब में बना रहता है। यहां जिला चिकित्सालय स्थित आरटी-पीसीआर लैब में महीनों से बिना किसी डर व थकान के वायरस के साथ रह रहे यह लैब टेक्नीशियन किसी असली हीरो से कम नहीं है। लैब में प्रभारी चिकित्सक के निर्देशन में करीब दो दर्जन से अधिक लैब टेक्नीशियन व रिसर्च असिस्टेंट आदि कर्मचारी सेवा दे रहे हैं। इस दौरान लैब में काम करते हुए पांच कर्मचारी संक्रमण की चपेट में आने से पॉजिटिव भी हो गए, लेकिन हौसला कायम रहा। सभी एक-दूसरे को कोरोना से जंग जीतने के लिए हिम्मत बंधाते रहे। इस दौरान न किसी का जज्बा कम हुआ ओर न किसी को थकान हुई।
छह माह पहले शुरू इस लैब में 25 मई को 50 हजार सेम्पल की जांच कर ली है। 18 नवम्बर को आरटी-पीसीआर मशीन के इंस्टॉलेशन एवं व्यवस्थाओं को परखने के बाद एम्स जोधपुर के निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा ने यहां कोविड.19 की जांच के लिए स्वीकृति जारी की थी। उस समय डॉ. हर्षा रानी लैब प्रभारी थी। इसके बाद आईसीएमआर की ओर से आई-डी पासवर्ड जारी किए गए। 3 दिसम्बर 2020 को मेडिकल कॉलेज कोटा के माइक्रोबायलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर भूपेन्द्र मंडावर की देखरेख में ट्रायल की गई। एक पखवाड़ा बाद डॉ. हर्षा रानी के स्थान पर कोटा से नियुक्त डॉ. गजेन्द्र व्यास (माइक्रोबायोलॉजी) ने सेवा दी। पिछले कुछ महीनों से कोटा के डॉ. ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी लैब प्रभारी का कार्य देख रहे हैं।

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घरों पर भी लगाते मास्क
वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन सोभागमल सुमन ने बताया कि जब से कोरोना आया है तब से जुटे हुए हैं तो अब परिवार से दूर भी कब तक रहें। लेकिन एहतियात के तौर पर लैब से घर पहुंचते हैं तो वहां बाहर ही कपड़े खोलते हैं। खुद ही कपड़े धोते हैं। डिटॉल के पानी से नहाते हैं। छोटे बच्चों को अलग कमरों में सुलाते हैं। परिजनों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। इससे घर पर भी अधिकांश समय मास्क लगाकर ही रहते हैं।


सेम्पल हैंडलिंग में सबसे जोखिम
लैब में सबसे अधिक जोखिम काम सेम्पल हैडलिंग करना होता है। इसे नेगेटिव प्रेशर रूम में सेम्पल को खोला जाता है। कैबिन में पीपीई किट पहनकरअन्दर जाते हैं। इसके बाद विभिन्न स्तर की जांच के लिए घंटो कैबिन में बिताने होते हंै। लैब में बिना किसी कंटामिनेशन के काम करने के लिए सावधानी बरतनी पड़ती है। सेम्पल जांच की कई स्टेप होती है। हर स्टेप पर प्लेटफार्म को क्लीन करना पड़ता है तथा वायरस को समाप्त करने के लिए अल्ट्रा वायलेट-सी लाइट में छोडऩा पड़ता है।

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लैब में वायरस के साथ घंटों पीपीई किट में रहने के दौरान संक्रमण का जोखिम तो हर पल बना रहता है, लेकिन सावधानी ही बचाव है। लैब में टेक्नीशियन व अन्य स्टॉफ काम के प्रति खासे समर्पण भाव से जुटे रहते हंै। कुछ तो सुबह आए गए तो फिर रात तक पूरा काम होने तक लगे रहते हैं।
डॉ. ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, प्रभारी, आरटी-पीसीआर लैब, जिला चिकित्सालय बारां



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