झोलाछाप की करतूत : न डिग्री थी और न ही दवा बेचने का लाइसेंस
बारां. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से गठित चिकित्सा विभाग एवं औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने मांगरोल तहसील के रायथल गांव में एक झोलाछाप चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की। उसके दवाखाने से नकली दवा के संदेह में दो नमूने भी लिए गए।
सीएमएचओ डॉ. सपतराज नागर ने बताया कि झोलाछाप चिकित्सक तीर्थाशंकर के क्लीनिक पर छापामार कार्रवाई की गई। इस दौरान उक्त चिकित्सक बिना वैध चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधुनिक पद्धति से उपचार करता मिला। टीम के द्वारा पूछताछ करने पर उसने बताया कि उसके पास कोई डिग्री नहीं है। क्लीनिक पर अवैध रूप से विक्रय करने के लिए एलोपैथिक औषधियां संग्रहित एवं प्रदर्शित की हुई थी। औषधियों के क्रय व विक्रय बिल एवं औषधि अनुज्ञा पत्र ड्रग लाइसेंस भी नहीं मिला।
औषधि नियंत्रण अधिकारी नरेंद्र कुमार राठौर द्वारा क्लीनिक पर पाई गई एंटीबायोटिक, शेड्यूल वन की ड्रग व टेरॉयड इत्यादि औषधियों को औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 एवं नियमावली 1945 के प्रावधान के तहत जब्त की। एचडी ओके नकली होने की संभावना पर दोषियों के नमूने जांच के लिए गए। उक्त औषधियों के अभिरक्षा आदेश के लिए न्यायालय में आवेदन पेश किया। जांच रिपोर्ट आने पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। जांच दल में औषधि नियंत्रण अधिकारी राठौर के अलावा सुरेंद्र कुमार पारेता, डॉ. नवल किशोर नागर, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रायथल एवं अशोक सुमन आदि शामिल थे। औषधि नियंत्रण अधिकारी ने बताया कि आगे भी झोलाछाप व अवैध उपचार केन्द्रों पर कार्यवाही जारी रहेगी एवं झोलाछाप अवैध चिकित्सकों को दवा सप्लाई करने वालों के खिलाफ भी सत्य कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
source https://www.patrika.com/baran-news/had-neither-a-degree-nor-a-license-to-sell-medicine-7033619/
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