वेंटिलेटर छत्तीस और चलाने वाले दो, फिर इलाज कैसे हो
बारां. कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए जिले मेें भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिनों से तैयारी की जा रही है, लेकिन अब तक वेंटिलेटर का 24 घंटे नियमित संचालन करने के लिए आवश्यक कुशल निश्चेतना विशेष चिकित्सकों (एनेस्थेशिया) का टोटा है। हाल यह है कि जिला चिकित्सालय में करीब 36 वेंटिलेटर उपलब्ध है, लेकिन वेंटिलेटर पर रहने वाले अतिगंभीर मरीजों को संभालने के लिए जिले में मात्र दो कुशल निश्चेतना विशेषज्ञ हैं। जबकि मरीज की श्वसन क्रिया को नियंत्रित करने के लिए निश्चेतना विशेषज्ञ की खास आवश्यकता रहती है। हालांकि जिले में दो और एनेस्थेसिया है, लेकिन उन्होंने सर्टिफिकेट कोर्स ही किए हुए हैं। इससे वे सीजेरियन ही करा सकते हैं।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले में बड़ी संया में मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता हुई थी। उस समय सरकार व जनप्रतिनिधियों के सहयोग से वेंटिलेटर तो उपलब्ध हो गए, लेकिन कुशल विशेषज्ञ एनेस्थेसिया का टोटा होने से अधिकांश वेंटिलेटर का उपयोग तक नहीं हुआ था। इसे देखते हुए सामान्य तौर पर वेंटिलेटर ऑपरेट करने के लिए जिला चिकित्सालय के करीब 50 चिकित्सक व 60 नर्सिंगकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इससे वे वेंटिलेटर ऑपरेट तो कर सकते है, लेकिन किसी मरीज के ट्यूब डालने व अन्य तकनीकी कार्य करने का जोखिम नहीं उठा सकते।
जरूरत के मुताबिक नहीं चिकित्सक
जिला चिकित्सालय में वर्तमान में तीन आईसीयू वार्ड संचालित हैं। इसमें से छह बेड का एक जनरल आईसीयू तो पहले से संचालित है। कोविड-19 वायरस सक्रिय होने परपहले 12 बेड का आईसीयू शुरू किया गया। इसमें वेंटिलेटर की भी व्यवस्था की गई। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित मरीजों को इसमेंं रखने के लिए अक्सर मरीजों को बेड खाली नहीं मिलते थे। अब तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक होने की संभावनाओं के तहत आठ बेड का शिशु आईसीयू तैयार किया गया। इसमें भी वेंटिलेटर लगाए गए हंै। इस तरह हर वर्ष आईसीयू व वेंटिलेटर बढ़ रहे हंै, लेकिन उस हिसाब से निश्चेतना कुशल विशेषज्ञ नहीं बढ़ रहे है। वर्तमान में यहां करीब आधा दर्जन निश्चेतना विशेषज्ञों की जरूरत है।
यहां व आईसीयू, ना वेंटिलेटर मौजूद
जिले में एक मात्र जिला चिकित्सालय में ही आईसीयू की सुविधा है। इसके अलावा छबड़ा, अन्ता, किशनगंज, शाहाबाद, अटरू, कवाई तथा हरनावदाशाहाजी आदि प्रमुख सीएचसी पर भी आईसीयू की सुविधा नहीं है। आईसीयू नहीं होने से जिले के ग्रामीण कस्बाई क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा भी नहीं है। संभावित तीसरी लहर के दौरान भी कोरोना के अतिगंभीर संक्रमित मरीजों को दूर-दराज क्षेत्र से जिला मुख्यालय आना होगा।
बारां व अटरू में दो कुशल एनेस्थेसिया विशेषज्ञ है। छबड़ा, केलवाड़ा में एक-एक सर्टिफिके्रट कोर्स किए चिकित्सक हैं। 50 चिकित्सक व 60 नर्सिंगकर्मियों को भी ट्रेनिंग दी गई है। वे सामान्य वेंटिलेटर ऑपरेटर कर सकते है। अतिगंभीर मरीज संभालने के लिए विशेषज्ञ चाहिए।
डॉ. सपतराज नागर, सीएमएचओ
source https://www.patrika.com/baran-news/ventilator-thirty-six-and-two-running-then-how-to-be-treated-7035636/
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