यहां दिखती है बाय-बाय करती बस, टाटा करती ट्रेन

अन्ता. इसे राजनीतिक दृष्टि से बुरे दिनों की पराकाष्ठा कहें या स्थानीय जन प्रतिनिधियों की घोर उदासीनता.. इन दिनों रेलवे स्टेशन पर एक भी यात्री गाड़ी नहीं रुक रही। वहीं रोडवेज की अधिकांश बसें कस्बे के बाहर सीधे हाइवे से निकल आम जनता को चिढ़ा रही हैं। ऐसे में आम नागरिक का इस बात पर कुढऩा स्वाभाविक है कि आखिर उनसे वोट किस सुविधा के नाम पर लिए गए।
गत 22 मार्च 2020 को कोराना गाइडलाइन की वजह से अन्य स्टेशनों की तरह अन्ता रुकने वाली आधा दर्जन यात्री ट्रेनों का ठहराव बंद हो गया था। महामारी ठंडी पडऩे के बाद जबलपुर अजमेर के बीच फर्राटे भरती दयोदय एक्सप्रेस, कोटा से इंदौर तक जाने वाली इंटरसिटी एवं भोपाल से जोधपुर के बीच संचालित ट्रेन फिर से शुरू कर दी गई। लेकिन इन सभी का अन्ता से ठहराव हट गया। ऐसे में एक ही दिन में अन्ता से जयपुर एवं इंदौर की यात्रा कर वापसी करने वाले यात्री यह सुविधा बंद हो जाने से परेशान हैं।
वहीं प्रबुद्धजनों का कहना है कि अन्ता कस्बे का राजनीतिक दृष्टिकोण से कोई धड़ी धोरी नहीं रहने के बाद ऐसी स्थिति बनी है।

खूब सुविधाएं जुटाई, पर काम न आई
दयोदय एक्सप्रेस यहां रुकने की वजह से अन्ता प्लेटफार्म की लम्बाई बढ़ाई गई थी। एक से दूसरे प्लेटफार्म पर आने के लिए ओवरब्रिज का निर्माण जारी है। कोराना काल अवधि में अन्ता रेलवे स्टेशन नए भवन में शिफ्ट हो चुका है। वहीं दोहरी रेल लाइन के कार्य को गति मिली है। लेकिन कोरोना काल खत्म होने के बाद यहां से टाटा कर निकलती यात्री ट्रेनों को देख अन्ता एवं आसपास के यात्री आक्रोशित हैं।

यह कैसी मजबूरी
कोरोना स्पेशल के नाम से चली ट्रेनों का अन्ता में ठहराव बंद कर दिए जाने के बाद से यात्री इनमें कोटा अथवा बारां से बैठते हैं। वापसी में यह गाडिय़ां रात्रि में आने की वजह से अन्ता का साधन नहीं मिलता। ऐसे में पूरी रात बारां या कोटा में गुजारनी पड़ती है। रोडवेज की अधिकांश बसें कस्बे में प्रवेश नहीं कर यात्रियों को हाइवे के किनारे ही उतार जाती हैं। जहां से दो किमी दूर अन्ता आने के लिए पैदल चलना मजबूरी है।



source https://www.patrika.com/baran-news/here-is-the-bus-doing-bye-bye-the-train-doing-tata-7096038/

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