जहां पियक्कड़ों की फौज, वहां ब्लैकियों की मौज

बारां. सरकार की ओर से बीते 23 दिनों में आबकारी नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया। इसका खामियाजा राजस्व नुकसान केे रूप में सरकार को ही भुगतना पड़ रहा है। यही ही नहीं जिले में अब तक आधी ही शराब की दुकानों का उठाव होने से कई इलाके ऐसे शेष बचे हैं, जहां एक भी दुकान नहीं है। इसका फायदा अवैध रूप से शराब बेचने वाले उठा रहे हैं। जिले में कम्पोजिट शराब की 169 दुकानें स्वीकृत हैं। इनमें से अब तक 87 का ही नवीनीकरण हुआ है। 82 दुकानों के नवीनकरण मे पुराने संवेदकों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। इतना ही नहीं जिले में अभी तक भांग का ठेका भी नहीं हुआ है।
जिले में शराब की बड़ी मात्रा में खपत होती है। इसके चलते आबाकरी विभाग ने यहां की सभी 169 दुकानों को कम्पोजिट (देसी व अंग्रेजी बेचने के लिए अधिकृत) कर दिया था। इसके बाद ठेकेदारों का आबकारी शुल्क भी बढकर 42 प्रतिशत हा़े गया। इन हालात में शराब ठेकेदारों ने पहले तो लाइसेंस के नवीनीकरण में कोई रुचि नहीं दिखाई तथा जिले में महज 22 लाइसेंस ही नवीनीकृत हो सके। इसके बाद सरकार की ओर से ई-टेडरिंग प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन इसमें भी शराब बेचने वालों के रुचि नहीं दिखाने के बाद 30 प्रतिशत शुल्क कम किया गया। तब कहीं जाकर जिले में 87 दुकानों का उठाव हुआ। इनमें अब तक 85 दुकानें शुरू हुई हैं। कमोबेश ऐसे ही हालात के चलते जिले में भांग का ठेका भी नहीं हुआ।
लाइसेंस इधर का बेबच रहे उधर
सरकार की ओर से अब तक प्रदेश में आबाकारी नीति को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं किए जाने से जिले में ब्लैक में शराब बेचने वाले चांदी कूट रहे हैं। इन्होंने उन स्थानों पर अनाधिकृत रूप से शराब का विक्रय शुरू कर दिया जहां दुकानें नहीं उठी हैं। इतना ही नहीं लाइसेंस ले चुके कई कारोबारी भी उनके अधिकृत क्षेत्रों से बाहर जाकर खुलेआम शराब बेचने से नहीं हिचक रहेञ यही हाल भांग को लेकर भी हैं।
सरकार को 10 करोड़ की चपत
जिले में गत वर्ष अप्रेल माह में आबाकारी शुल्क के रूप में लगभग 16 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। जबकि इस वर्ष अब तक 6.63 करोड़ रुपए का ही राजस्व मिला है। इससे सरकार के राजस्व में लग रही सेंध का सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है। जानकार सूत्रों का कहना है कि जिले में शराब की खपत कम नहीं हुई। लेकिन इसे अनाधिकृत रूप से बेचे जाने से यह हालात बने हैं।
-राज्य सरकार व आबाकारी निदेशक के निर्देश पर जिले में विशेष अभियान चालया जा रहा है। इसके तहत अवैध रूप से मदिरा बेचने वालों की धरकपड़ के साथ शराब भी बरामद की जा रही है। अब राज्य सरकार की ओर से जल्द ही कोई कारगर नीति घोषित की जाएगी। इसके बाद जिले में शेष बची 82 दुकानों का आंवटन होगा।
-तपेशचंद जैन, जिला आबकारी अधिकारी



source https://www.patrika.com/baran-news/where-there-are-no-authorized-shops-the-blackies-have-made-canteens-7486542/

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