OMG! ये क्या हुआ... कभी ये चलती थी चौबीसों घंटे, अब छह माह से 6 घंटे ही चल रही
विजय बत्रा. अन्ता. कई माह तक बिना रुके बिजली उत्पादन करने वाली एनटीपीसी की अन्ता गैस विद्युत परियोजना गत् लगभग छह माह से मात्र 6 घंटे ही संचालित हो रही है। मंहगी गैस से बिजली उत्पादन के कारण पावर ग्रिड से इतने ही समय प्लांट चलाने का आदेश मिलता है। इसमें भी रविवार को सार्वजनिक अवकाश पर विद्युत खपत में कमी से बिजली उत्पादन बंद रखने की नौबत आने लगी है। अन्ता परियोजना इस डिजाइन पर बनी है कि संयत्र लगातार 12 माह बिना रुके चल सकता है। पहले स्थिति भी यही थी। लेकिन अब बार-बार संयत्र को चालू एवं बंद करने से गैस की खपत बढऩे के साथ ही मशीनरी पर दबाव पडऩे से हालात विकट होने से उत्पादन लागत भी बढ़ गई। प्लांट में केन्द्र सरकार प्रदत्त अनुदानित प्राकृतिक गैस से बनी बिजली की अनुमानित लागत 4 से 5 रुपए प्रति यूनिट होती है। लेकिन यह गैस प्राथमिकता के आधार पर खाद कारखानों एवं अन्य जगह दिए जाने से खुले बाजार से गैस लेना मजबूरी है। रूस एवं यूक्रेन के बीच युद्ध छिडऩे के बाद अन्तराष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम काफी बढ़ गए। इससे खुली नीलामी से गैस लेने पर जो बिजली पहले 14-15 रुपए प्रति यूनिट पड़ती थी। उसकी लागत अब बढ$कर करीबन दोगुनी हो गई। इतनी मंहगी बिजली अधिकाशत: कोई राज्य लेने को तैयार नहीं होता।
सोलर परियोजनाओं ने बिगाड़ा गणित
अन्ता परियोजना लम्बे समय से सांय 4 से रात्रि 10 बजे या दोपहर 2.30 से रात्रि 8 बजे तक संचालित हो रही है। प्लांट को पूरी क्षमता पर चलाने के लिए प्रतिदिन दो मिलियन गैस की जरूरत है। लेकिन अनुदानित गैस की वर्तमान उपलब्धता से प्लांट दो घंटे भी नहीं चलाया जा सकता। हालांकि अब एक उपक्रम से थोड़ी सस्ती गैस मिलनी शुरू हुई है, लेकिन वह भी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने कई जगह सोलर एवं पवन परियोजनाएं स्थापित कर दी। इनसे उत्पादित विद्युत काफी सस्ता पडऩे से सरकार मंहगी बिजली लेने से मुंह मोड़ रही है। रात्रि में सोलर प्लांट बिजली नहीं बना सकते इसलिए अन्ता परियोजना को कुछ समय के लिए ही आपूर्ति आदेश मिलता है। दूसरी ओर सौर उर्जा संचालित संयत्र इन दिनों एनटीपीसी अन्ता में भी निर्माणाधीन है।
उल्टे हो चले हालात
अन्ता गैस विद्युत परियोजना में 419 मेगावाट क्षमता की चारों इकाइयां पूर्णतया सक्षम होने के बावजूद कई साल से हिचकोले खा रही हैं। इन दिनों हालात यह हैं कि बिजली उत्पादन में अग्रणी कम्पनी को बाकी समय यानि रात्रि से दूसरे दिन दोपहर तक अन्ता आवासीय कॉलोनी तथा मशीनरी को सपोर्ट देने के लिए उल्टा पावर ग्रिड से बिजली खरीदनी पड़ती है। 156.12 हेक्टेयर जमीन पर स्थापित यह प्लांट सन् 1986 में शुरू किया गया। लेकिन सन् 2013-14 से ही अन्य विकल्पों से सस्ती बिजली मिलने के कारण विभिन्न राज्यों की निर्भरता इस पर कम होती चली गई। ऐसे में अब अत्यधिक जरूरी होने पर ही अन्ता परियोजना को उत्पादन आदेश मिल पाता है।
source https://www.patrika.com/baran-news/anta-thermal-gas-project-ntpc-anta-ntpc-power-house-electricity-7877853/
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