बारां की मिट्टी में गुणवत्ता का गेहूं, देशभर में डिमांड

बुवाई से पहले दो बार हकाई-जुताई
किसान सोनू सुमन ने बताया कि वे गेहूं की बुवाई करवाने से खेत की दो बार हकाई-जुताई करवाते हैं। पाटा भी फि रवाया था जिससे खेत की मिट्टी एक समान हो जाए। उन्होंने 40 किलो गेहूं व 20 किलो डीएपी खाद मिलाकर बुवाई करवाई है।

पहली सिंचाई बीस से पच्चीस दिनों में
गेहूं की फ सल में पहली सिंचाई लगभग 20 से 25 दिन के अंतराल में होती है। पहली सिंचाई के साथ उगे बथुआ, बटली, सुवा की रोकथाम के लिए 2-4 डी नामक खरपतवार नाशक का प्रयोग किया जाता है।

बालियां निकलने से पूर्व दूसरी सिंचाई
गेहूं में दूसरी सिंचाई बालियां निकलने से पूर्व की जाती है। गेहूं की बढ़वार के लिए लगभग 30 किलो प्रति बीघा यूरिया खाद का प्रयोग किया जाता है। खेत में अच्छी तरह बालियां बनने के बाद तीसरी सिंचाई देते हैं।

डंठल सूखने पर कटाई
गेहूं की फ सल पीली पडऩे या नीचे से गेहूं के डंठल सूखने पर इसकी कटाई की जाती है। थ्रेसर से भूसा बनवा लेते हैं। जिन लोगों के पास जानवर नहीं है, वे हार्वेस्टर मशीन से कटाई करवाते हैं।

गेहूं का उत्पादन व भाव
किसानों ने गेहूं की अल्फा 4037 किस्म का प्रयोग किया है। इसका उत्पादन लगभग 11 क्विंटल प्रति बीघा तक हो जाता है। मंडी में भाव 2400 रु. प्रति क्विंटल तक होता है। फ सल में बुवाई से कटाई तक 5000 से 6,000 तक का खर्चा आ जाता है। संपूर्ण खर्चा निकालने के बाद लगभग 12,000 रुपये तक की बचत हो जाती है।

जितेंद्र नायक — बडगांव



source https://www.patrika.com/baran-news/wheat-farming-7929627/

Comments

Popular posts from this blog

कोरोना को लेकर चिकित्सा विभाग हुआ अलर्ट

Rajasthan Assembly Election 2023 : पुल नहीं तो वोट नहीं पर अड़े हैं होड़ापुरा के ग्रामीण

कोरोनाकाल के बाद रक्षाबंधन पर बाजार में रौनक, बिक रही सोने और चांदी की राखियां