#OMG!! रकतदन कय त पत लग क शरर त ह बमरय क घर

बारां. जिले में रक्तदान को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। यहां के रक्तदाताओं के जज्बे के चलते ही बारां का ब्लड सेंटर प्रदेश स्तर पर स्वैच्छिक रक्तदान करने में पहचान बनाए हुए हैं, लेकिन कुछ रक्तदाताओं का रक्त हेपटाइसिस बी व सी की बीमारी के चलते नष्ट भी करना पड़ रहा है। इनमें से अधिकांश को रक्तदान करने के लिए की गई जांच के बाद ही पता लगा कि उनका शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। जिला अस्पताल स्थित ब्लड केन्द्र पर पिछले करीब ढेड वर्ष के दौरान हेपेटाइसिस बी, सी व एचएआईवी आदि बीमारी से पीडि़त लोगों का 533 यूनिट रक्त डिस्कार्ड किया गया है।

यू होता है रक्त नष्ट
सूत्रों के मुताबिक ब्लड बैंक में खून के सैंपल की जांच की जाती है। जांच में किसी तरह की बीमारी सामने आने के बाद उसे निर्धारित तापमान पर रखकर ऑटोक्लेव किया जाता है। इस प्रक्रिया से ब्लड के संक्रमण की स्थिति का पता लगता है। इसके बाद संक्रमित ब्लड को बायोवेस्ट के तहत नष्ट कर दिया जाता है ओर संबंधित रक्तदाता व्यक्ति को बीमारी की सूचना देकर उसे उच्च संस्था में काउंसिङ्क्षलग के लिए भेजा जाता है।

- जिला अस्पताल के ब्लड केन्द्र पर बीते करीब डेढ़ वष्र के दौरान 20 हजार 215 यूनिट रक्तदान से संग्रहित किया गया था। इसमें से जांच के बाद करीब 5सो यू्रनिट संक्रमित पाया गया। संक्रमित ब्लड को तो नियमानुसार डिस्काड्र कर दिया गया। रक्तदान से सम्बंधित रक्तदाता को उसकी बीमारी का पता लग गया। इससे लोगों को रक्तदान करते रहना चाहिए।
डॉ. बीएल मीणा, प्रभारी, ब्लड बैंक, जिला अस्पताल



source https://www.patrika.com/baran-news/blood-donation-donation-blood-bank-hospital-blood-donetion-society-8321150/

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