स्कूल में देवी सरस्वती की फोटो पर विवाद: सोशल मीडिया दो पक्षों में बंटा, तो टीचर ने पोस्ट में लिखी ये बात
बारां। 26 जनवरी को सामने आई स्कूल में देवी सरस्वती की तस्वीर को लेकर हुए विवाद पर सोशल मीडिया पर लोग दो पक्षों में बंटे नजर आए। एक पक्ष ने शिक्षिका का समर्थन किया है तो वहीं दूसरा पक्ष कार्रवाई और सस्पेंड करने की मांग कर रहा है। हालांकि इन सबके बीच शिक्षिका जो पूरे प्रक्ररण के दौरान चर्चा में है, उनके नाम के सोशल मीडिया अकाउंट पर दो पोस्ट साझा किया गया है। पहले में लिखा गया है, “स्कूल द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में घुस कर कुछ अवांछित लोगों द्वारा माहौल ख़राब करने और स्कूल प्रशासन को धमकाने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी गई है। हालाँकि बिना किसी वैध आधार के क्रॉस FIR दर्ज करना पुलिस की मंशा पर भी प्रश्न खड़ा करता है।”
वहीं दूसरे पोस्ट में ये लिखा गया है कि ना डरी हूं, ना डरूंगी। जब तक है सांस लड़ती रहूंगी। शिक्षा की देवी सावित्री बाई फुले जिंदाबाद।
साथ ही सोशल मीडिया पर प्रक्ररण के बाद से ही यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी। एक यूजर ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर शिक्षिका के समर्थन में लिखा है, सरकारी विद्यालयों के मास्टर क्या यह बता सकते हैं कि सरस्वती का जन्म व मृत्यु कब हुई? सरस्वती ने कौन सी किताब लिखी? विद्या व ज्ञान के क्षेत्र में उनका क्या योगदान रहा ?
वहीं एक अन्य यूजर ने विरोध में लिखा है कि, आदरणीय सावित्री बाई फुले ने खुद अपनी कविता मे माता सरस्वती को विद्या कि देवी कहा, पर आप लोग उनको पढने के बजाय आप लोग समाज मे माता सरस्वती का अपमान कर रहे हैं। क्या आंबेडकर ने यही शिक्षा दी क्या आप लोगो को?
एक अन्य पोस्ट में यूजर ने लिखा, ‘शिक्षा तर्क और सवालों को जन्म देती है।गाँवों वालों ने बाबा साहेब व सावित्री बाई फुले की तस्वीर लगाने का विरोध किया तो बहन हेमलता बैरवा उनको तर्क सहित जवाब दिया। गर्व की बात है वैचारिक क्रांति आगे बढ़ रही है। इस महिला टीचर को सम्मानित करना चाहिए, जो बच्चों को सही दिशा में ले जा रही।’
विवाद क्या था?
गौरतलब है कि मामला बारां जिले की किशनगंज पंचायत समिति के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय लकडाई का है। जहां गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान देवी सरस्वती की तस्वीर को लेकर विवाद हो गया। जिसका वीडियो वायरल है। दरअसल, हुआ यूं कि गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मंच पर गांधी जी, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर व देवी सरस्वती की तस्वीर लगाई गई। जिसे बाद में हटाकर शिक्षिका ने सावित्री बाई फुले की तस्वीर लगा दी, जिसका ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद शिक्षिका का तस्वीर हटाने का तर्क वायरल हो गया जिसमें वह कह रहीं है कि शिक्षा के क्षेत्र में सरस्वती का क्या योगदान है? हालांकि बाद में शिक्षिका ने देवी सरस्वती की तस्वीर लगाई और माला भी पहनाए।
source https://www.patrika.com/baran-news/controversy-over-photo-of-goddess-saraswati-in-school-social-media-divided-into-two-sides-8698264/
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